बलरामपुर: ग्राम धनघटा में जिला पंचायत के नाला निर्माण पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, एक सप्ताह में ही दरारें और छेद!
oplus_0
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
बलरामपुर: ग्राम धनघटा में जिला पंचायत के नाला निर्माण पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, एक सप्ताह में ही दरारें और छेद!

विकास के नाम पर बड़ा सवाल
बलरामपुर। उत्तर प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करती है, वहीं जनपद बलरामपुर के तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के धनघटा गांव से सामने आई तस्वीरें कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां जिला पंचायत की ओर से कराए जा रहे नाला निर्माण कार्य पर ग्रामीणों ने मानक विहीन निर्माण, घटिया सामग्री के उपयोग और भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गुणवत्ता का निर्माण होना चाहिए था, वह मौके पर दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर नाले में दरारें पड़ने लगी हैं और जगह-जगह छेद भी दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप – मानकों से किया गया समझौता

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि जहां अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग होना चाहिए था, वहां कथित तौर पर निम्न स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही निर्माण की यह स्थिति है, तो आने वाले समय में यह नाला अधिक दिनों तक टिक नहीं पाएगा। ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी बताते हुए पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
एक सप्ताह में दरारें, जगह-जगह जॉइंट और छेद
ग्रामीणों के अनुसार नाले का निर्माण पूरा भी नहीं हुआ कि उसमें कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगीं। लोगों का दावा है कि नाले में जगह-जगह अनावश्यक जॉइंट बनाए गए हैं और कई हिस्सों में छेद भी नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ हुआ होता तो इतनी जल्दी इस प्रकार की स्थिति सामने नहीं आती। स्थानीय लोगों ने वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से भी इन कमियों को दिखाने का प्रयास किया है।
सवाल पूछने पर पत्रकारों से ही उलझने का आरोप

मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सामग्री को लेकर सवाल पूछे गए तो जिम्मेदार लोगों ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय पत्रकारों और ग्रामीणों से ही सवाल-जवाब शुरू कर दिए। आरोप यह भी है कि कहा गया कि अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार का निर्माण कराया गया है। इस जवाब से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।
जिम्मेदार कौन – ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या निर्माण एजेंसी ने मानकों की अनदेखी की? क्या तकनीकी अधिकारियों ने निर्माण कार्य की निगरानी सही ढंग से नहीं की? या फिर पूरे मामले में लापरवाही बरती गई? इन सभी सवालों का जवाब अब केवल निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच उठे सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते रहे हैं। सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी समय-समय पर दिए जाते रहे हैं। ऐसे में धनघटा गांव के इस निर्माण कार्य को लेकर उठे आरोप प्रशासन और जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी होगा, वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो इसकी भी आधिकारिक जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग – हो उच्चस्तरीय जांच
धनघटा गांव के लोगों ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत और संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला से जांच कराकर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों जरूरी हैं, क्योंकि यह जनता के टैक्स के पैसे से किए जाते हैं।
फिलहाल धनघटा गांव का यह नाला निर्माण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजर जिला प्रशासन और जिला पंचायत की कार्रवाई पर है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी, जिम्मेदारी तय होगी और यदि कहीं अनियमितता मिली तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नोट: इस समाचार में वर्णित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी बातें स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space







