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कमजोर मानसून का खरीफ फसलों पर असर, बुआई का रकबा 16% घटा; गन्ने की खेती में बढ़ी किसानों की दिलचस्पी

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कमजोर मानसून का खरीफ फसलों पर असर, बुआई का रकबा 16% घटा; गन्ने की खेती में बढ़ी किसानों की दिलचस्पी

 

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नई दिल्ली। देश में कमजोर मानसून और कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर दिखाई दे रहा है। धान, मक्का, बाजरा, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के बुआई क्षेत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा है।

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कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले शुक्रवार तक देश में खरीफ फसलों का कुल बुआई क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत कम दर्ज किया गया। कमजोर मानसून के चलते कई क्षेत्रों में किसान समय पर खरीफ फसलों की बुआई नहीं कर सके हैं।

 

गन्ने की बुआई का रकबा बढ़ा

 

आंकड़ों के मुताबिक, 10 जुलाई तक देश में करीब 57.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुआई हो चुकी है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 56.7 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले पांच वर्षों का औसत करीब 54.2 लाख हेक्टेयर रहा है।

 

गन्ने की फसल में पानी की अधिक जरूरत होती है। इसके बावजूद किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। माना जा रहा है कि एथेनॉल की बढ़ती मांग और गन्ने से बेहतर आमदनी की उम्मीद किसानों के इस रुझान की बड़ी वजह है।

 

दलहन और तिलहन की बुआई में बड़ी गिरावट

 

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन में सबसे अधिक गिरावट दलहन फसलों के रकबे में दर्ज की गई है। दलहन का बुआई क्षेत्र 23 प्रतिशत से अधिक घटा है। वहीं मोटे अनाज यानी बाजरा और मक्का का रकबा करीब 22 प्रतिशत, तिलहन का 21 प्रतिशत, कपास का 15 प्रतिशत और चावल का बुआई क्षेत्र करीब 9 प्रतिशत कम हुआ है।

 

दलहन और तिलहन की कम बुआई चिंता का विषय मानी जा रही है। यदि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर दाल और खाद्य तेलों की उपलब्धता तथा कीमतों पर पड़ सकता है।

 

कम पानी वाली फसलों से भी किसानों की दूरी

 

बाजरा और मक्का जैसी फसलों में धान और गन्ने के मुकाबले कम पानी की जरूरत होती है। इसके बावजूद इन फसलों के बुआई क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि किसान फसल विविधीकरण के बजाय ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनकी बाजार में बेहतर कीमत और खरीद की संभावना अधिक हो।

 

अब आने वाले दिनों में मानसून की चाल खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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