गोरखपुर में कथित लोन ठगी का मामला: गरिमा सिंह और पिता पर बढ़ता शिकंजा, अब तक 9 FIR दर्ज
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गोरखपुर में कथित लोन ठगी का मामला: गरिमा सिंह और पिता पर बढ़ता शिकंजा, अब तक 9 FIR दर्ज
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लोन दिलाने और पुराने कर्ज को खत्म कराने का भरोसा देकर कथित करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है। इस मामले में गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ अब तक 9 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। ताजा मामलों में गोरखपुर के एम्स और महाराजगंज के घुघली थाने में शिकायतें दर्ज की गई हैं।

पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, लोगों को पुराने लोन से राहत दिलाने या नया लोन दिलाने का भरोसा देकर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज कराया गया। आरोप है कि लोन की रकम मिलने के बाद उसका एक बड़ा हिस्सा दूसरे खातों में ट्रांसफर कराया गया और बाद में ईएमआई का भुगतान बंद हो गया, जिससे संबंधित लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
9 FIR तक कैसे पहुंचा मामला?
22 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में अब तक नौ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें कई शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग रकम की कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
– 1 अगस्त: गोरखपुर जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने करीब 1.67 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मुकदमा दर्ज कराया।
– 5 अगस्त: पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह ने करीब 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी की शिकायत की।
– 5 अगस्त: सहजनवां थाने में स्टेशन अधीक्षक संदीप पांडेय की शिकायत पर 60 लाख रुपये की कथित ठगी का केस दर्ज हुआ।
– 9 अगस्त: स्टेशन अधीक्षक मोहन सिंह की शिकायत पर करीब 93.20 लाख रुपये की कथित ठगी का मुकदमा दर्ज हुआ।
– 13 अगस्त: गोरखनाथ थाने में डॉक्टर के भाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से जुड़ा मुकदमा दर्ज किया गया।
– 14 अगस्त: टीटी अभिमन्यु कुमार ने करीब 52.29 लाख रुपये की कथित ठगी का आरोप लगाते हुए शाहपुर थाने में FIR दर्ज कराई।
– 16 अगस्त: शिक्षक सुग्रीव सिंह ने करीब 83.87 लाख रुपये की कथित ठगी की शिकायत की।
– 17 अगस्त: महाराजगंज के घुघली थाने में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने करीब 1.37 करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई।
– 18 अगस्त: स्टेशन अधीक्षक ब्रह्मानंद सिंह ने करीब 45 लाख रुपये की कथित ठगी का मुकदमा दर्ज कराया।
इस तरह अलग-अलग शिकायतों के सामने आने के साथ मामला लगातार विस्तृत होता गया है।
1.67 करोड़ रुपये वाले मामले से हुई शुरुआत
रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती मामलों में गोरखपुर जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि लोन दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और विभिन्न बैंकों से कर्ज कराया गया। इस मामले में पुलिस ने गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की।

पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कथित तौर पर लोन की किस्तों का भुगतान कुछ समय तक किया गया, जिससे संबंधित लोगों को भरोसा बना रहा। बाद में किस्तें बंद होने पर बैंक की ओर से रिकवरी का दबाव शुरू हुआ।
डॉक्टर परमात्मा सिंह का मामला बना गंभीर मोड़
मामले में सबसे गंभीर घटनाक्रम पशु चिकित्साधिकारी डॉ. परमात्मा सिंह से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, डॉक्टर ने गरिमा सिंह के खिलाफ करीब 1.40 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि पुराने होम लोन को खत्म कराने का भरोसा देकर उनके नाम पर कई बैंकों से लोन कराया गया।
इसके बाद डॉक्टर परमात्मा सिंह ने गोरखपुर में एक अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस को कथित तौर पर एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें गरिमा सिंह को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने की बात सामने आई। इस मामले में पुलिस ने अलग से जांच शुरू की है।
महत्वपूर्ण: सुसाइड और कथित ठगी के बीच कानूनी संबंध की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।
शिक्षक के नाम पर 83.87 लाख रुपये के लोन का आरोप
तिवारीपुर थाने में दर्ज मामले में शिक्षक सुग्रीव सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें एक योजना में लाभ दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप के मुताबिक, उनके दस्तावेजों के आधार पर छह बैंकों से कुल करीब 83.87 लाख रुपये का लोन कराया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, लोन की रकम खाते में आने के बाद करीब 77 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कराए गए और बाकी रकम खाते में छोड़ी गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्हें भरोसा दिया गया था कि निर्धारित समय में पूरा लोन समाप्त हो जाएगा, लेकिन बाद में ईएमआई का भुगतान बंद हो गया।
महाराजगंज में भी सामने आया नया मामला
मामले की जांच का दायरा गोरखपुर से आगे महाराजगंज तक पहुंच गया है। घुघली थाने में डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने शिकायत दी कि उन्हें कार लोन खत्म कराने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में उनके नाम पर करीब 1.37 करोड़ रुपये का लोन करा दिया गया।
इस मुकदमे में गरिमा सिंह, ध्रुव नारायण सिंह समेत कई अन्य लोगों के साथ अलग-अलग बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस पूरे मामले में संबंधित बैंकिंग लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
डायरी में लिखा था बड़ा आर्थिक लक्ष्य
मामले की जांच के दौरान गरिमा सिंह की एक डायरी मिलने की बात भी सामने आई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डायरी में उन्होंने खुद को अरबपति बनाने और एक निश्चित समय में 100 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य लिख रखा था।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर लोन की जरूरत वाले लोगों को पुराने कर्ज से राहत दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद उनके नाम पर नया लोन कराने और रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप हैं।
पुलिस जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने
मामले में गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह के अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अलग-अलग शिकायतों, बैंक दस्तावेजों, लोन आवेदन, खातों में हुए लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की जांच कर रही है।
कुछ मामलों में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। महाराजगंज के घुघली थाने में दर्ज मामले में छह बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी नामजद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब आगे क्या?
लगातार नई शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित ठगी में इस्तेमाल हुए पैसों के पूरे लेनदेन का पता लगाना है। किन लोगों के नाम पर कितना लोन कराया गया, रकम किन खातों में गई, कितनी रकम वापस की गई और इसमें अन्य लोगों या बैंक कर्मचारियों की क्या भूमिका रही—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
फिलहाल गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह जेल में हैं, जबकि मामले में दर्ज अलग-अलग FIR की जांच जारी है। अदालत में आरोप साबित होना अभी बाकी है। इसलिए मामले से जुड़े सभी आरोपों को फिलहाल कथित आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
गोरखपुर का यह कथित लोन फ्रॉड मामला लगातार विस्तार ले रहा है। एक के बाद एक शिकायतें सामने आने से FIR की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि कथित लोन नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल थे, कितनी रकम का वास्तविक लेनदेन हुआ और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या निकलती है।
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