अब AC में गैस भरवाने का झंझट होगा खत्म? बिना रेफ्रिजरेंट घर ठंडा करेगी नई तकनीक
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अब AC में गैस भरवाने का झंझट होगा खत्म? बिना रेफ्रिजरेंट घर ठंडा करेगी नई तकनीक
Refrigerant Free AC Technology: क्या आने वाले समय में एयर कंडीशनर में गैस भरवाने की जरूरत ही खत्म हो जाएगी? दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसी नई कूलिंग तकनीकों पर तेजी से काम कर रहे हैं, जो पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस के बिना घरों और इमारतों को ठंडा कर सकती हैं। इस तकनीक को भविष्य के एयर कंडीशनिंग सिस्टम के बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत जैसे देशों में भीषण गर्मी के दौरान एयर कंडीशनर लोगों के लिए राहत का बड़ा जरिया बन चुका है। हालांकि, मौजूदा एसी सिस्टम को चलाने में काफी बिजली खर्च होती है और कूलिंग के लिए रेफ्रिजरेंट गैस की जरूरत पड़ती है। इसी चुनौती को देखते हुए वैज्ञानिक अब Solid-State Cooling Technology विकसित करने में जुटे हैं।
क्यों बढ़ी नई कूलिंग तकनीक की जरूरत?
यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में लगातार बढ़ते तापमान ने कूलिंग सिस्टम की मांग बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के दौरान कई देशों में पोर्टेबल एसी और पंखों की मांग में तेजी देखने को मिली।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2050 तक दुनिया के करीब दो-तिहाई घरों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा हो सकती है। ऐसे में बिजली की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती है।
क्या है Solid-State Cooling Technology?
सॉलिड-स्टेट कूलिंग टेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस के बिना ठंडक पैदा करना है। इसमें विशेष प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जो दबाव, मैग्नेटिक फील्ड या इलेक्ट्रिक करंट मिलने पर अपना तापमान बदल सकती है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली रेफ्रिजरेंट गैसों पर निर्भरता कम हो सकती है।
Nickel-Titanium से पैदा होगी ठंडक
जर्मनी की सारलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक निकल-टाइटेनियम मिश्र धातु पर काम कर रहे हैं। इस तकनीक को Elastocaloric Cooling कहा जाता है।
इसमें विशेष धातु को खींचने और फिर छोड़ने की प्रक्रिया के जरिए तापमान में बदलाव किया जाता है। शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक ने कमरे के तापमान को करीब 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम करने की क्षमता दिखाई है।
रिसर्च टीम आयरलैंड की कंपनी Exergyn के साथ मिलकर रेफ्रिजरेंट-फ्री हीट पंप तकनीक पर भी काम कर रही है। लक्ष्य आने वाले वर्षों में नई इमारतों में इसके शुरुआती इस्तेमाल का रास्ता तैयार करना है।
नई कूलिंग तकनीक पर काम कर रही कई कंपनियां
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई कंपनियां वैकल्पिक कूलिंग सिस्टम विकसित करने में जुटी हैं। Mimic Systems सेमीकंडक्टर आधारित हीट पंप तकनीक पर काम कर रही है।
Magnotherm मैग्नेटिक फील्ड आधारित कूलिंग सिस्टम विकसित कर रही है और इसकी टेस्टिंग सुपरमार्केट जैसे स्थानों पर की जा चुकी है।
वहीं, Barocal प्लास्टिक क्रिस्टल आधारित तकनीक पर काम कर रही है। इस तकनीक में दबाव के जरिए गर्मी को बाहर निकालने की कोशिश की जाती है।
मौजूदा AC क्यों बन रहे पर्यावरण के लिए चुनौती?
आज इस्तेमाल होने वाले अधिकतर एयर कंडीशनर फ्लोरिनेटेड रेफ्रिजरेंट गैसों पर निर्भर हैं। ये सिस्टम प्रभावी कूलिंग देते हैं, लेकिन बिजली की खपत अधिक हो सकती है।
इसके अलावा रेफ्रिजरेंट गैसों के रिसाव से पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग पर गंभीर प्रभाव पड़ने की चिंता भी जताई जाती रही है। इसी वजह से कई देश ऐसी गैसों के इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
बाजार में कब आएगी नई कूलिंग टेक्नोलॉजी?
फिलहाल अधिकतर रेफ्रिजरेंट-फ्री कूलिंग तकनीकें रिसर्च, प्रोटोटाइप और शुरुआती ट्रायल के चरण में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें काफी संभावनाएं हैं, लेकिन बड़े स्तर पर बाजार में पहुंचने में अभी समय लग सकता है।
इन तकनीकों की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि बड़े एसी और कूलिंग सिस्टम निर्माता इन्हें कितनी तेजी से अपनाते हैं और इनकी लागत आम ग्राहकों के लिए कितनी किफायती रहती है।
सिर्फ AC नहीं, इमारतों का डिजाइन भी बदलेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में केवल नई कूलिंग मशीनें ही गर्मी का समाधान नहीं होंगी। बेहतर वेंटिलेशन, शेडिंग, रिफ्लेक्टिव मटेरियल और स्मार्ट बिल्डिंग डिजाइन पर भी ध्यान देना होगा।
दुनिया के कई शहर वैकल्पिक कूलिंग नेटवर्क पर भी काम कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में घरों को ठंडा रखने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
फिलहाल बिना गैस वाले AC का सपना बाजार से कुछ दूरी पर है, लेकिन जिस तेजी से सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक पर रिसर्च हो रही है, उससे भविष्य में AC में बार-बार गैस भरवाने की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
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