बलरामपुर में अवैध खून का कारोबार! दो संविदाकर्मी गिरफ्तार, कई जिलों तक फैले नेटवर्क का खुलासा
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बलरामपुर में अवैध खून का कारोबार! दो संविदाकर्मी गिरफ्तार, कई जिलों तक फैले नेटवर्क का खुलासा
बलरामपुर। जिले में अवैध रक्त कारोबार के सनसनीखेज मामले में दो संविदाकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद सरकारी स्वास्थ्य तंत्र और निजी ब्लड बैंकों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और श्रावस्ती ब्लड बैंक में कार्यरत सौरभ श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। जांच में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से लेकर कई जिलों तक फैले अवैध रक्त कारोबार के नेटवर्क से जुड़े अहम तथ्य सामने आए हैं।
नौ महीने तक पैथोलॉजिस्ट की डिग्री के कथित फर्जी इस्तेमाल का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर में करीब नौ महीने तक एक पैथोलॉजिस्ट की डिग्री का कथित रूप से फर्जी इस्तेमाल किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
गिरफ्तार सौरभ श्रीवास्तव की पत्नी शिवानी श्रीवास्तव भी इसी ब्लड सेंटर में काउंसलर के पद पर कार्यरत बताई गई हैं। जांच एजेंसियां पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।
ब्लड सेंटर सील, लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति
मामले की गंभीरता को देखते हुए औषधि प्रशासन ने केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर को सील कर दिया है। साथ ही सेंटर का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति करते हुए जिलाधिकारी, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और उत्तर प्रदेश रक्त संचरण परिषद को रिपोर्ट भेजी गई है।
बलरामपुर से सिद्धार्थनगर तक फैला था नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के अनुसार, देवीपाटन मंडल के बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती समेत आसपास के जिलों में इसी नेटवर्क के जरिए कथित अवैध रक्त कारोबार संचालित किया जा रहा था। गोंडा में ‘न्यू केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर’ नाम से एक अन्य शाखा के संचालन की जानकारी भी सामने आई है।
आरोप है कि बलरामपुर से सिद्धार्थनगर तक रक्त की आपूर्ति की जाती थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि नेटवर्क इतने बड़े क्षेत्र में सक्रिय था तो संबंधित विभागों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की?
बच्ची की मौत के बाद खुलने लगीं नेटवर्क की परतें
मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब गोंडा के मनकापुर में कथित रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के बाद एक बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद नेटवर्क की जांच तेज हुई और कई अहम तथ्य सामने आने लगे।
पैथोलॉजिस्ट ने दिखाई इस्तीफे की रिसीविंग
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) की ओर से गठित जांच समिति ने पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला से पूछताछ की। डॉ. शुक्ला ने जांच समिति को बताया कि उन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने 16 अक्टूबर की कार्यालय रिसीविंग भी जांच टीम के सामने प्रस्तुत की। इसके बाद ब्लड सेंटर में उनकी डिग्री और दस्तावेजों के कथित इस्तेमाल को लेकर जांच और गंभीर हो गई है।
संविदा लैब टेक्नीशियन के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू
जांच अधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। संविदा लैब टेक्नीशियन अभिषेक के विरुद्ध बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी हुई जांच
इस प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी जांच तेज कर दी है। जांच टीम ने तुलसीपुर स्थित पैसेफिक चैरिटेबल ब्लड सेंटर और उतरौला के फ्यूचर केयर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का निरीक्षण किया।
अधिकारियों के अनुसार दोनों संस्थानों में ब्लड स्टॉक, डोनर रजिस्टर, बायोकेमिस्ट्री जांच, ब्लड बैग और किट समेत अन्य व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं। जांच टीम ने डोनरों से फोन पर संपर्क कर रिकॉर्ड का सत्यापन भी किया, जिसमें कोई अनियमितता सामने नहीं आई।
स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
अवैध रक्त कारोबार के इस मामले ने निजी ब्लड बैंकों की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बड़ा सवाल यह है कि कथित फर्जी दस्तावेजों और कई जिलों तक फैले नेटवर्क की भनक जिम्मेदार विभागों को समय रहते क्यों नहीं लगी?
फिलहाल जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रिपोर्ट: विराट न्यूज़ 24 लाइव
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