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श्रावस्ती पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला; बोले- ‘चोरी नहीं, यह बड़ी कलाकारी है

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श्रावस्ती पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला; बोले- ‘चोरी नहीं, यह बड़ी कलाकारी है’

 

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श्रावस्ती। गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध यात्रा के तहत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज पहली बार श्रावस्ती जनपद पहुंचे। इकौना और भिनगा समेत जिले के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ उनका भव्य स्वागत किया। यात्रा दोपहर करीब 1 बजे शुरू होकर शाम लगभग 5 बजे तक चली।

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इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शंकराचार्य के दर्शन और स्वागत के लिए जगह-जगह मौजूद रहे। पूरे यात्रा मार्ग पर धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।

 

मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट और बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राम मंदिर में दान की कथित चोरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह इसे ‘चोरी नहीं, बल्कि कलाकारी’ मानते हैं।

 

शंकराचार्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या का मुकदमा लड़ने वाले लोगों ने मामला जीतने के बाद वहां खास लोगों का ट्रस्ट बना लिया। उन्होंने ट्रस्ट के गठन और मंदिर निर्माण में धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

 

उन्होंने कहा, ‘करोड़ों लोगों के सामने इतनी बड़ी कलाकारी कर दी गई कि किसी को समझ भी नहीं आया कि माल कैसे पार कर दिया गया।’

 

वहीं, बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर शंकराचार्य ने सरकार के नियंत्रण वाले धार्मिक स्थलों की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां सरकार का नियंत्रण होता है, वहां धार्मिक भावना के बजाय केवल प्रबंधन की क्षमता रह जाती है।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन सिर्फ मैनेजमेंट के आधार पर नहीं किया जा सकता। मंदिरों और धार्मिक संस्थानों की सेवा करने वाले लोगों में धार्मिक भावना और आस्था होना बेहद जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि धार्मिक भावना की कमी के कारण ही मंदिरों में चोरी और कदाचार जैसी घटनाएं सामने आती हैं। शंकराचार्य के इन बयानों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और सरकारी नियंत्रण वाले धार्मिक स्थलों की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

 

रिपोर्ट – विराट न्यूज़ 24 लाइव, श्रावस्ती

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