9 करोड़ का बांध बह गया! मुजेहना में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
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9 करोड़ का बांध बह गया! मुजेहना में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
श्रावस्ती। भिनगा विधानसभा क्षेत्र के मुजेहना इलाके से बांध के क्षतिग्रस्त होने की गंभीर तस्वीर सामने आई है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया बांध नदी की तेज धारा का दबाव नहीं झेल सका, जिसके चलते बांध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बह गया।
बताया जा रहा है कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और तेज बहाव के कारण बांध में लगाए गए पत्थर, बोल्डर और सुरक्षात्मक लेयर को भी नुकसान पहुंचा है। इससे आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
बांध के क्षतिग्रस्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल इसकी निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई संरचना नदी की तेज धारा के सामने टिक नहीं पाई, तो निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री और अपनाए गए तकनीकी मानकों की जांच होनी चाहिए।
वहीं, बांध को बचाने और कटान रोकने के लिए फिलहाल बोरी, बल्ली, ईंट और मिट्टी जैसे अस्थायी उपाय किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बड़े बोल्डर और सुरक्षात्मक लेयर पानी के तेज बहाव को रोकने में सफल नहीं हो सके, तो अस्थायी उपाय आखिर कितने प्रभावी साबित होंगे।
भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप
स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग पूरे निर्माण कार्य की जांच कराए और यह पता लगाया जाए कि परियोजना में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। साथ ही बांध के क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों का भी तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
गांवों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
बांध के आसपास स्थित गांवों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। यदि नदी का जलस्तर बढ़ता रहा और कटान जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कराने और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल बांध के क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों रुपये की परियोजना की गुणवत्ता, निर्माण मानकों और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
अब सवाल यह है कि करीब 9 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना नदी की तेज धारा के सामने क्यों टिक नहीं पाई? क्या निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी रही? क्या निर्धारित मानकों का पालन किया गया था? और यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की टीम से तत्काल तकनीकी जांच कराए, प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
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