37 करोड़ का सिसवारा घाट पुल… 8 महीने में सड़क पर संकट! राप्ती के कटान ने बढ़ाई चिंता, अब उठ रहे बड़े सवाल
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37 करोड़ का सिसवारा घाट पुल… 8 महीने में सड़क पर संकट! राप्ती के कटान ने बढ़ाई चिंता, अब उठ रहे बड़े सवाल
श्रावस्ती। जिले के गिलौला ब्लॉक स्थित सिसवारा घाट पुल के पास से सामने आई तस्वीरों ने विकास कार्यों और नदी के कटान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और उससे जुड़े लिंक मार्ग के आसपास राप्ती नदी का कटान लगातार चिंता बढ़ा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुल और सड़क निर्माण को अभी करीब आठ महीने ही हुए हैं, लेकिन अब लिंक मार्ग के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। सड़क के किनारे जमीन कटने से सवाल उठ रहा है कि अगर कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में क्या स्थिति होगी?

करोड़ों का पुल… और सड़क के किनारे कटान!
सिसवारा घाट क्षेत्र में राप्ती नदी का दबाव बढ़ने के साथ सड़क के आसपास कटान दिखाई दे रहा है। यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो पुल से जुड़े लिंक मार्ग को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है।

हालांकि कटान रोकने के लिए मौके पर बचाव कार्य किए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह इंतजाम स्थायी समाधान देगा या नदी का कटान फिर नई चुनौती खड़ी करेगा?
पहले उठी थी आवाज, फिर भी हालात यहां तक कैसे पहुंचे?
इस मामले को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। अप्रैल महीने में ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से सिसवारा घाट क्षेत्र की स्थिति सामने लाई गई थी और समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाने की जरूरत बताई गई थी।
अब जब सड़क के आसपास कटान का खतरा दिखाई दे रहा है तो सवाल यह भी उठ रहा है कि उस समय जिम्मेदार विभागों ने कितनी गंभीरता दिखाई और क्या स्थायी सुरक्षा उपाय किए गए?

37 करोड़ की लागत… अब जांच की मांग
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हुए इस महत्वपूर्ण पुल और संपर्क मार्ग को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज है। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाए।
सवाल यह हैं—
▪️ करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और सड़क की योजना क्या थी?
▪️ निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का कितना पालन हुआ?
▪️ नदी के कटान को देखते हुए सुरक्षा की पूर्व व्यवस्था क्यों नहीं हुई?
▪️ क्या निर्माण के दौरान नदी के बहाव और कटान का पर्याप्त आकलन किया गया था?
▪️ अब किए जा रहे बचाव कार्य से समस्या का स्थायी समाधान होगा या नहीं?
सवाल सड़क का नहीं, हजारों लोगों की आवाजाही का है
सिसवारा घाट का यह मार्ग स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। यदि कटान बढ़ता है और लिंक मार्ग को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो इसका सीधा असर क्षेत्र के लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से जांच करानी चाहिए। साथ ही यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल…
37 करोड़ रुपये का पुल, महज कुछ महीनों का सफर और सड़क के सामने कटान का संकट—आखिर ऐसी नौबत क्यों आई?
क्या राप्ती के कटान पर समय रहते पूरी तरह काबू पाया जा सकेगा?
क्या सिसवारा घाट के इस महत्वपूर्ण लिंक मार्ग को सुरक्षित बचा लिया जाएगा?
या फिर आने वाले दिनों में नदी का कटान कोई ऐसा मंजर दिखाएगा, जिसकी आज सिर्फ आशंका जताई जा रही है?
फिलहाल मौके पर बचाव कार्य जारी है। अब सबकी नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है।
सिसवारा घाट, गिलौला, श्रावस्ती
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