करोड़ों के विकास के दावों के बीच अमरहवा फिर पानी-पानी! सड़क से कब्रिस्तान तक बदहाल, अब उठे विकास के पूरे हिसाब पर सवाल
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करोड़ों के विकास के दावों के बीच अमरहवा फिर पानी-पानी! सड़क से कब्रिस्तान तक बदहाल, अब उठे विकास के पूरे हिसाब पर सवाल
सिरसिया/श्रावस्ती। अमरहवा ग्राम सभा में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। एक तरफ गांव में विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश होते ही सड़कें जलमग्न, रास्ते बदहाल और कब्रिस्तान तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में सवाल सीधा है—अगर विकास पर पैसा खर्च हुआ है, तो उसका असर जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

हालिया बारिश और राप्ती योजक नहर के पानी से अमरहवा में जलभराव की स्थिति सामने आई। मुख्य मार्ग से लेकर कई घरों के आसपास तक पानी पहुंच गया। ग्रामीणों का कहना है कि कब्रिस्तान तक जाने वाला रास्ता भी पानी और कीचड़ से प्रभावित है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अमरहवा की यह बदहाली सिर्फ बारिश की देन है?
ग्रामीणों के मुताबिक, नवंबर 2025 में भी गांव में जलभराव, गंदगी, जाम नालियों और बदहाल रास्तों की समस्या सामने आई थी। महीनों बीतने के बाद भी यदि वही समस्या दोबारा खड़ी है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि स्थायी जलनिकासी और बेहतर रास्तों की व्यवस्था आखिर क्यों नहीं हो सकी?

“बजट नहीं आ रहा”—तो फिर विकास का हिसाब कौन देगा?
ग्रामीणों के अनुसार, विकास को लेकर सवाल पूछे जाने पर कथित तौर पर ग्राम प्रधान की ओर से “हमारी सरकार नहीं है, बजट नहीं आ रहा” जैसी बात कही गई। हालांकि इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ग्राम प्रधान का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचकर जनता से वोट मांगते हैं, लेकिन विकास की बारी आने पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी जाती है।
अब ग्रामीणों के बीच सवाल गूंज रहा है—
“वोट के समय सब अपने, फिर विकास के समय जनता अकेली क्यों?”
तालाब, सड़क और कब्रिस्तान के रास्ते पर भी सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा में तालाब, सड़क और अन्य विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद कई स्थानों पर जमीनी समस्याएं बरकरार हैं। कब्रिस्तान तक पहुंचने वाले रास्ते की बदहाली को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों की मांग है कि पिछले वर्षों में ग्राम पंचायत में स्वीकृत सभी विकास कार्यों की सूची, स्वीकृत धनराशि, भुगतान और मौके पर हुए कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराया जाए।
अगर रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाया गया है, तो ग्रामीणों का सवाल है—
“फिर जमीन पर विकास दिखाई क्यों नहीं देता?”
कागजों में विकास या जमीन पर?
मामला सिर्फ पानी भरने का नहीं है। असली सवाल जवाबदेही और विकास के परिणाम का है।
यदि ग्राम सभा के विकास के लिए लगातार धन स्वीकृत और खर्च किया जा रहा है, तो ग्रामीणों को आज भी सड़क, जलनिकासी और रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दूध का दूध, पानी का पानी किया जाए।
अब सांसद, विधायक और प्रधान से भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सांसद, विधायक, ग्राम प्रधान और बीडीसी—सभी जनता के प्रतिनिधि हैं। ऐसे में अमरहवा की समस्याओं का समाधान कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब सवाल सिर्फ प्रधान से नहीं, बल्कि पूरी विकास व्यवस्था से है।
करोड़ों का विकास बजट आया तो विकास गया कहां?
कागजों पर सड़क बनी या जमीन पर?
तालाब और जलनिकासी की व्यवस्था कहां है?
कब्रिस्तान तक जाने वाले रास्ते की बदहाली कब दूर होगी?
और सबसे बड़ा सवाल
अमरहवा को हर बारिश में पानी-पानी होने से आखिर कब मुक्ति मिलेगी?
ग्रामीण अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम और विकास का पूरा हिसाब चाहते हैं।
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