श्रावस्ती में चकमार्ग कब्जे का मामला: अधिवक्ता ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, DM के आदेश के बाद भी कार्रवाई पर संशय
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श्रावस्ती में चकमार्ग कब्जे का मामला: अधिवक्ता ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, DM के आदेश के बाद भी कार्रवाई पर संशय
श्रावस्ती/भिनगा। भिनगा तहसील क्षेत्र के लक्ष्मणपुर बाजार अंतर्गत अमरहवा गांव में चकमार्ग से जुड़े एक पुराने विवाद ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के अधिवक्ता पवन कुमार गुप्ता ने तहसील प्रशासन के अधिकारियों पर मामले में लापरवाही बरतने और मौके की स्थिति के विपरीत रिपोर्ट लगाए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अधिवक्ता का कहना है कि चकमार्ग पर कथित कब्जे का यह मामला पिछले करीब चार वर्षों से लंबित है। उनके मुताबिक, मामले को लेकर लगातार नोटिस और तारीखों की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन कथित रूप से चकमार्ग को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दी।
DM के आदेश के बाद रिपोर्ट पर उठे सवाल
पवन कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्होंने मामले को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष भी प्रार्थना पत्र दिया था। उनका दावा है कि जिलाधिकारी की ओर से मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसीलदार भिनगा को निर्देश दिए गए थे।

अधिवक्ता का आरोप है कि इसके बाद उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में रास्ता साफ करा दिए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, उनका दावा है कि मौके पर स्थिति अलग है और वहां अभी भी कथित तौर पर दीवार बनी हुई है।
इसी को लेकर अब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर होने का सवाल उठ रहा है।
पैमाइश और रिपोर्टिंग को लेकर भी आरोप
अधिवक्ता पवन कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि लेखपाल और राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर पैमाइश करते हैं, लेकिन इसके बाद ऐसी रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है जिसमें रास्ता खाली बताया जाता है। उनका दावा है कि मौके पर कथित दीवार अथवा कब्जे की स्थिति अभी भी बनी हुई है।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और मौके की रिपोर्टिंग से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मामला हो सकता है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप अधिवक्ता द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है।
चार साल से समाधान का इंतजार
अधिवक्ता का कहना है कि लंबे समय से मामला लंबित होने के कारण चकमार्ग से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि उन्होंने कई स्तरों पर अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
अब मुख्य सवाल यह है कि यदि प्रशासनिक रिपोर्ट में चकमार्ग को खाली बताया गया है, तो मौके पर कथित दीवार की स्थिति क्या है? क्या वास्तव में रास्ते को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया गया है या फिर कार्रवाई केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित रही?
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाने की बात
पवन कुमार गुप्ता ने कहा है कि यदि तहसील स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचकर मामले से जुड़े दस्तावेज और मौके के साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
वहीं, इस मामले में संबंधित तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। प्रशासन की ओर से यदि कोई जांच रिपोर्ट, स्पष्टीकरण अथवा मौके के निरीक्षण की जानकारी सामने आती है तो उससे मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
फिलहाल मामला लगाए गए आरोपों और दावों के स्तर पर है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच और मौके का स्थलीय सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि मौके पर वास्तव में चकमार्ग पर कब्जा या दीवार पाई जाती है और सरकारी रिकॉर्ड में रास्ता खाली दर्शाया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत होगी। वहीं, यदि राजस्व विभाग की रिपोर्ट सही है तो प्रशासन के लिए मौके की स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा।
अब देखना होगा कि करीब चार वर्षों से लंबित बताए जा रहे अमरहवा गांव के इस चकमार्ग विवाद में प्रशासन कब निर्णायक कार्रवाई करता है और क्या विवाद का समाधान वास्तव में जमीन पर दिखाई देता है।
नोट: इस खबर में चकमार्ग कब्जे, रिपोर्टिंग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए आरोप संबंधित अधिवक्ता पवन कुमार गुप्ता के कथन पर आधारित हैं। संबंधित तहसीलदार, कानूनगो एवं लेखपाल का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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