आवास की दूसरी किस्त आते ही खाते से निकल गए ₹67,400, मोबाइल नंबर बदलने का भी आरोप; इकौना में विधवा महिला ने उठाए गंभीर सवाल
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आवास की दूसरी किस्त आते ही खाते से निकल गए ₹67,400, मोबाइल नंबर बदलने का भी आरोप; इकौना में विधवा महिला ने उठाए गंभीर सवाल
श्रावस्ती/इकौना।
प्रधानमंत्री आवास की दूसरी किस्त की रकम खाते में पहुंचने के बाद कथित तौर पर हजारों रुपये की UPI निकासी का मामला सामने आया है। इकौना क्षेत्र की एक गरीब विधवा महिला ने थाना इकौना में प्रार्थना पत्र देकर बैंक खाते से करीब 67,400 रुपये की कथित अनधिकृत निकासी की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
महिला के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 को उसके बैंक खाते में आवास योजना की दूसरी किस्त के रूप में 70 हजार रुपये की राशि पहुंची थी। महिला का कहना है कि उसे इस रकम से अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ाना था। लेकिन इसके बाद खाते से UPI के माध्यम से अलग-अलग लेन-देन होने की जानकारी सामने आई और करीब 67,400 रुपये खाते से निकल गए।
सबसे बड़ा सवाल—मोबाइल नंबर बदला कैसे?
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि महिला का दावा है कि उसने बैंक खाते से जुड़ा अपना मोबाइल नंबर नहीं बदला था। इसके बावजूद खाते में दूसरा मोबाइल नंबर दर्ज मिला।
अब सवाल यह है कि बैंक खाते में दर्ज मोबाइल नंबर आखिर किस प्रक्रिया से बदला गया? क्या मोबाइल नंबर बदलने के लिए बैंक में कोई आवेदन या KYC प्रक्रिया हुई थी? यदि हुई तो आवेदन किसने किया? और यदि महिला की सहमति के बिना नंबर बदला गया तो बैंक के रिकॉर्ड में इसकी अनुमति किस माध्यम से दर्ज हुई?
इन सवालों का जवाब बैंक के मोबाइल नंबर परिवर्तन रिकॉर्ड, KYC/प्रोफाइल अपडेट रिकॉर्ड, UPI एक्टिवेशन की जानकारी और खाते के ट्रांजैक्शन लॉग से मिल सकता है।
UPI से रकम गई तो किस डिवाइस और खाते में पहुंची?
महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि 67,400 रुपये की रकम किन UPI ID या बैंक खातों में गई। प्रत्येक लेन-देन का UTR/Transaction ID, तारीख, समय, प्राप्तकर्ता की UPI ID और संबंधित बैंक खाते की जानकारी जांच का अहम हिस्सा होगी।
इसके अलावा यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि कथित UPI लेन-देन किस मोबाइल नंबर और किस डिवाइस से किया गया। इससे जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लेन-देन वास्तव में किस माध्यम से हुआ।
पुलिस और बैंक जांच से खुलेगा पूरा मामला
महिला ने थाना इकौना में प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। अब बैंकिंग रिकॉर्ड और पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि खाते से रकम किस तरीके से निकली और खाते में मोबाइल नंबर बदलने की प्रक्रिया कब और कैसे हुई।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को रकम निकालने का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। इसकी पुष्टि बैंक रिकॉर्ड, UPI ट्रांजैक्शन डिटेल और पुलिस/साइबर जांच के बाद ही हो सकेगी।
यदि यह अनधिकृत डिजिटल लेन-देन साबित होता है तो मामला साइबर वित्तीय अपराध की जांच के दायरे में भी आ सकता है। भारत सरकार के I4C के अनुसार वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal उपलब्ध हैं।
अब जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
1. खाते में मोबाइल नंबर किस तारीख को और किस प्रक्रिया से बदला गया?
2. मोबाइल नंबर बदलने के लिए किस दस्तावेज/प्रमाणीकरण का इस्तेमाल हुआ?
3. ₹67,400 की कथित UPI निकासी किस UPI ID में गई?
4. लेन-देन किस मोबाइल नंबर और डिवाइस से हुआ?
5. क्या महिला की सहमति से कोई UPI सुविधा सक्रिय या बदली गई थी?
6. बैंक और पुलिस जांच में इस लेन-देन की जिम्मेदारी किसकी सामने आती है?
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। वास्तविक स्थिति बैंकिंग रिकॉर्ड और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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