नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 20 हजार रुपये अर्थदंड
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नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 20 हजार रुपये अर्थदंड
श्रावस्ती में विशेष पॉक्सो न्यायालय का बड़ा फैसला, अर्थदंड में से 15 हजार रुपये पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश
श्रावस्ती। करीब पांच वर्ष पुराने नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय, श्रावस्ती ने अभियुक्त चंद्र भवन यादव उर्फ दिलीप कुमार को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अर्थदंड की राशि जमा न करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, न्यायालय ने अर्थदंड में से 15 हजार रुपये पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश भी पारित किया है।
पांच साल पुराना है मामला
अभियोजन के अनुसार घटना 14/15 अक्टूबर 2021 की रात थाना सिरसिया क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि करीब 14 वर्षीय किशोरी को अभियुक्त चंद्र भवन यादव उर्फ दिलीप कुमार पुत्र रामतीर्थ यादव, निवासी ग्राम धोबहा धर्मपुर, थाना इकौना, जनपद श्रावस्ती बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।
आरोप के मुताबिक अभियुक्त अपने रिश्तेदारों के सहयोग से किशोरी को दिल्ली ले गया, जहां उसे किराए के कमरे में करीब डेढ़ माह तक रखा गया। पीड़िता के बयान के आधार पर उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया।
करीब डेढ़ माह बाद अभियुक्त किशोरी को वापस लेकर आया। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता को थाने लाकर उसका बयान दर्ज किया। वादी की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना पूरी की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
आठ गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों पर फैसला
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय, श्रावस्ती में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रोहित गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन की ओर से आठ गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया।
गवाहों के बयानों और प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाया।
विशेष पॉक्सो न्यायालय श्रावस्ती के न्यायाधीश सौरभ सक्सेना ने अभियुक्त चंद्र भवन यादव उर्फ दिलीप कुमार को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है।
न्यायालय ने अर्थदंड की राशि में से 15 हजार रुपये पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश भी दिया।
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