सिसवारा में जमीन विवाद के बीच व्यक्ति की मौत को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग
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सिसवारा में जमीन विवाद के बीच व्यक्ति की मौत को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग
पुलिस की मौजूदगी में घटनाक्रम का दावा, वीडियो सामने आने के बाद कई सवाल; आरोपों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
गिलौला, श्रावस्ती। थाना गिलौला क्षेत्र के सिसवारा गांव में जमीन विवाद से जुड़े एक घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज है। सामने आए वीडियो को लेकर स्थानीय लोगों की ओर से कई दावे किए जा रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।
ग्रामीणों के दावे के अनुसार मामला केशव प्रसाद पासवान की जमीन से जुड़ा है। कुछ स्थानीय लोगों की ओर से जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया जा रहा है और इस दौरान पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति जमीन पर गिरा दिखाई देता है और आसपास लोगों की भीड़ नजर आती है। वीडियो को लेकर ग्रामीणों का दावा है कि व्यक्ति केशव प्रसाद पासवान हैं। लोगों के अनुसार पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर गई थी और बाद में वह जमीन पर गिर पड़े। पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें उपचार के लिए ले जाने का प्रयास किए जाने की बात भी ग्रामीणों की ओर से कही जा रही है।
इस घटनाक्रम को लेकर ग्रामीण कई सवाल उठा रहे हैं—पुलिस मौके पर किस शिकायत या आदेश के आधार पर पहुंची थी? राजस्व विवाद में राजस्व विभाग की क्या भूमिका थी? व्यक्ति को पुलिस अपने साथ क्यों ले गई? और घटनाक्रम के बाद उनकी चिकित्सकीय स्थिति क्या रही?
मौत के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी
मामले में केशव प्रसाद पासवान की मौत को लेकर भी स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है। हालांकि मौत की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। मृत्यु की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए अस्पताल के रिकॉर्ड, चिकित्सकीय रिपोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
वहीं, 22 सितंबर को इसी सिसवारा क्षेत्र में राजस्व कार्य के दौरान एक अलग पुलिस कार्रवाई में कमलेश पुत्र बृजलाल की मौत की पुलिस जानकारी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार कमलेश सरकारी वाहन से बाहर निकलने के प्रयास में घायल हुए थे और बाद में जिला अस्पताल में उनकी मौत हुई।
इसलिए दोनों घटनाओं के नाम और घटनाक्रम को अलग-अलग रखना जरूरी है, जब तक आधिकारिक रिकॉर्ड से इनके संबंध की पुष्टि न हो जाए।
जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
जमीन विवाद से जुड़े किसी भी मामले में राजस्व अभिलेख, मौके की स्थिति, संबंधित आदेश, पुलिस की कार्रवाई, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेज इस दावे की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
नोट: वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जमीन कब्जे, पुलिस कार्रवाई और मौत से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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