श्रावस्ती में PWD की ‘गड्ढामुक्त सड़क’ का दावा बेनकाब!
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श्रावस्ती में PWD की ‘गड्ढामुक्त सड़क’ का दावा बेनकाब!
सूरजकुंडा नाला के पास 20 मीटर सड़क बनी जानलेवा, तीन साल से शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ सुधार
सिरसिया/श्रावस्ती। योगी सरकार प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे कर रही है, लेकिन श्रावस्ती के सिरसिया क्षेत्र में सूरजकुंडा नाला के पास महज करीब 20 मीटर सड़क का हिस्सा इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि यहां से गुजरना राहगीरों के लिए लगातार जोखिम बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से सड़क की बदहाली को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को लगातार प्रार्थना पत्र और IGRS के माध्यम से शिकायतें दी जा रही हैं, लेकिन हर बार आश्वासन और कार्रवाई के नाम पर मामले को टाल दिया जाता है।

तीन साल से शिकायत, फिर भी नहीं जागा विभाग
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस जर्जर हिस्से पर आए दिन बाइक, साइकिल और अन्य वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 100 लोगों के दुर्घटनाग्रस्त होने, 50 से अधिक लोगों के गंभीर रूप से घायल होकर अपाहिज होने और लगभग 10 से 15 लोगों की मौत तक की घटनाएं इस मार्ग से जुड़ी रही हैं। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग और पुलिस अभिलेखों से होना बाकी है।
लोगों का कहना है कि सावन के दौरान कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। हर सोमवार को भी इस मार्ग पर हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय दावों के अनुसार महीने में दर्जनों लोग दुर्घटनाओं में घायल होते हैं।

आखिर जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क का खराब हिस्सा इतना छोटा है तो आखिर तीन वर्षों में इसकी मरम्मत क्यों नहीं हो सकी?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की नजर इस समस्या पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या विधायक या सांसद की निधि से भी इस छोटे से हिस्से का समाधान नहीं कराया जा सकता?
वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि डीएम और एसडीएम समेत जिले के तमाम अधिकारी इसी मार्ग से नियमित रूप से गुजरते हैं, फिर भी सड़क की बदहाली जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है?

रात में और बढ़ जाता है खतरा
सड़क की बदहाली के साथ-साथ मौके पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात में खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास के लोगों ने अस्थायी रूप से गड्ढों में ईंटें डलवाकर आवागमन को कुछ हद तक आसान करने का प्रयास किया, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ।
हिंदू आर्मी जिलाध्यक्ष ने उठाई आवाज, दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर हिंदू आर्मी के जिला अध्यक्ष प्रेम नारायण पांडेय ने जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रेम नारायण पांडेय ने आरोप लगाया कि शासन की ओर से सड़कों को गड्ढामुक्त करने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में यहां ‘गड्ढामुक्त’ नहीं बल्कि ‘गड्ढायुक्त’ सड़क दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि यदि 10 तारीख तक सड़क का निर्माण/मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो 11 तारीख को क्षेत्र के लोग एकजुट होकर सड़क जाम और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रशासन ने इसके बाद भी सुनवाई नहीं की तो क्षेत्र के लोग आपसी सहयोग से सड़क के इस छोटे से हिस्से को ठीक कराने का प्रयास करेंगे।

कजरी तीज और कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को लेकर चिंता
प्रेम नारायण पांडेय ने कहा कि 14 तारीख को कजरी तीज का पर्व है और इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होगी। कांवड़ यात्रियों और अन्य श्रद्धालुओं का भी आवागमन रहता है। ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल सड़क की मरम्मत कराई जाए।
अब बड़ा सवाल—क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
करीब तीन वर्षों से शिकायतें, IGRS के माध्यम से आवेदन और लगातार स्थानीय स्तर पर उठती आवाज के बावजूद यदि सड़क की हालत जस की तस है तो सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है।
क्या PWD के अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे?
क्या जनप्रतिनिधि इस छोटे से सड़क हिस्से की समस्या का स्थायी समाधान कराएंगे?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
अब देखना यह है कि 11 तारीख के आंदोलन से पहले जिम्मेदार विभाग इस जानलेवा सड़क पर कार्रवाई करता है या फिर तीन साल की तरह एक बार फिर सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है।
नोट: दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या स्थानीय लोगों/आंदोलनकारियों के दावों पर आधारित है। आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि संबंधित पुलिस विभाग और लोक निर्माण विभाग के अभिलेखों से किया जाना आवश्यक है।
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