मीना समिति से बदली रोशनी की जिंदगी! अब बेझिझक रखती है अपनी बात, बालिकाओं ने दिया बाल विवाह रोकने का संदेश
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मीना समिति से बदली रोशनी की जिंदगी! अब बेझिझक रखती है अपनी बात, बालिकाओं ने दिया बाल विवाह रोकने का संदेश
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर KGBV में जागरूकता कार्यक्रम, नाटक-पेंटिंग और भाषण के जरिए उठे बाल अधिकारों के मुद्दे
श्रावस्ती। कभी अपनी बात रखने से झिझकने वाली रोशनी आज आत्मविश्वास के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रही है। मीना समिति से जुड़ने और अपने अधिकारों की जानकारी मिलने के बाद उसके व्यक्तित्व में आए बदलाव ने दूसरी छात्राओं को भी प्रेरित किया। यह प्रेरक कहानी अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आई।
विज्ञान फाउंडेशन द्वारा संचालित कवच 2.0 परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा, सुरक्षा, समानता और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनने के लिए प्रेरित करना रहा।
बाल विवाह रोकने और समान अधिकारों का दिया संदेश
कार्यक्रम में छात्राओं ने नाटक, पेंटिंग प्रतियोगिता, भाषण, सामूहिक चर्चा और रोल-प्ले के माध्यम से बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव, दुर्व्यवहार, शोषण और बालिकाओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रस्तुत किया।
इस दौरान पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से संदेश दिया कि प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
मीना समिति से मिला रोशनी को आत्मविश्वास
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कक्षा आठ की छात्रा रोशनी की प्रेरक कहानी रही। अपने अनुभव साझा करते हुए रोशनी ने बताया कि पहले वह विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने तथा लोगों के सामने अपनी बात रखने से झिझकती थी।
लेकिन मीना समिति से जुड़ने और अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद उसके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय बदलाव आया। अब वह निडर होकर अपनी बात रखती है और अपने फैसले स्वयं लेने के लिए पहले से अधिक सक्षम महसूस करती है।
रोशनी की कहानी ने अन्य छात्राओं को भी अपनी झिझक दूर करने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी।
बालिकाओं को सशक्त बनाने पर जोर
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा, जागरूकता और आत्मविश्वास के बल पर वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कार्यक्रम में बाल विवाह की रोकथाम, लैंगिक समानता और बालिकाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
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