दो मौतों के बाद भी नहीं चेता बिजली विभाग? खड़खड़वा गांव में झूल रही 11 हजार वोल्ट की लाइन, हादसे का इंतजार!
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दो मौतों के बाद भी नहीं चेता बिजली विभाग? खड़खड़वा गांव में झूल रही 11 हजार वोल्ट की लाइन, हादसे का इंतजार!
श्रावस्ती में बिजली व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, एक किलोमीटर में महज चार विद्युत पोल होने का आरोप; ग्रामीणों ने डीएम अन्नपूर्णा गर्ग से की जांच की मांग
श्रावस्ती। जिले के गिलौला विकासखंड के मोहम्मदापुर गांव में बिजली करंट की चपेट में आने से दो लोगों की मौत के बाद विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच उसी मौजा के अंतर्गत आने वाले खड़खड़वा गांव में बिजली व्यवस्था की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में विद्युत पोलों की कमी और जमीन से काफी नीचे लटक रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।
एक किलोमीटर में महज चार विद्युत पोल, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक, खड़खड़वा गांव में लगभग एक किलोमीटर की दूरी में महज चार विद्युत पोल लगाए गए हैं। उनका आरोप है कि जहां करीब 50 मीटर की दूरी पर पोल लगाए जाने की जरूरत थी, वहां लगभग 250 मीटर की दूरी पर पोल लगाए गए हैं। इसके चलते बिजली के तारों का फैलाव अधिक हो गया है और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत तारों की उचित ऊंचाई और सुरक्षित दूरी सुनिश्चित नहीं होने से खेतों में काम करने वाले किसानों की जान पर खतरा बना हुआ है।
जमीन से करीब 8 मीटर की दूरी पर लटक रही 11 हजार वोल्ट की लाइन!
ग्रामीणों का दावा है कि गांव में लगभग 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन जमीन से करीब आठ मीटर की ऊंचाई पर लटक रही है। उनका कहना है कि खेतों में कृषि कार्य करते समय थोड़ी-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते विद्युत लाइन की स्थिति की जांच कर आवश्यक सुधार नहीं किया गया, तो किसी दिन गंभीर हादसा हो सकता है। हालांकि, लाइन की वास्तविक ऊंचाई और सुरक्षा मानकों की स्थिति की आधिकारिक जांच होना अभी बाकी है।
हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
मोहम्मदापुर में दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसी बड़े हादसे के होने से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की जाती? ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली के खंभों, तारों और हाईटेंशन लाइनों की समय रहते जांच कर ली जाए और खामियों को दूर कर दिया जाए, तो कई संभावित हादसों को रोका जा सकता है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग से खड़खड़वा गांव का स्थलीय निरीक्षण कराने और विद्युत व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन को गांव पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए, ताकि समस्या का समाधान कागजों तक सीमित न रह जाए।
बिजली कनेक्शन जोड़ने के नाम पर पैसे मांगने का भी आरोप
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के स्थानीय कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली का कनेक्शन जोड़ने या तार लगाने जैसे कार्यों के लिए कथित तौर पर 200 से 300 रुपये की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि पैसे दिए बिना छोटे-मोटे विद्युत संबंधी कार्य भी आसानी से नहीं किए जाते।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विद्युत कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों की मांग—जांच हो, खामियां दूर हों और सुरक्षित हो बिजली व्यवस्था
खड़खड़वा गांव के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग से मांग की है कि गांव में विद्युत पोलों के बीच की दूरी, हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई और अन्य सुरक्षा मानकों की तत्काल जांच कराई जाए। जहां आवश्यक हो, वहां अतिरिक्त विद्युत पोल लगाए जाएं और लटकते तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा लोगों की जिंदगी के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए। मोहम्मदापुर की घटना के बाद अब खड़खड़वा गांव की समस्या को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी संभावित हादसे से पहले खड़खड़वा गांव की विद्युत व्यवस्था की जांच कराकर जरूरी सुधार कराएगा, या ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा के लिए किसी बड़ी घटना का इंतजार करना पड़ेगा?
नोट: इस खबर में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रकाशन से पहले संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारी का पक्ष लेना उचित होगा।
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