श्रावस्ती: डाइट इकौना में 17 शिक्षकों ने सीखे विज्ञान पढ़ाने के नए तरीके, कम लागत वाले मॉडलों से बच्चों में जगाएंगे वैज्ञानिक सोच!
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
श्रावस्ती: डाइट इकौना में 17 शिक्षकों ने सीखे विज्ञान पढ़ाने के नए तरीके, कम लागत वाले मॉडलों से बच्चों में जगाएंगे वैज्ञानिक सोच!
दो दिवसीय प्रशिक्षण में ब्रेन कैप, चंद्रयान और एंटी-ग्रैविटी मॉडल से समझे विज्ञान के सिद्धांत
इकौना, श्रावस्ती। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता विकसित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), इकौना में दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 8 और 9 अक्टूबर को अगस्त्या इंटरनेशनल फाउंडेशन की विद्या वाहिनी पहल के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के 17 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गतिविधि आधारित और प्रयोगात्मक शिक्षण के विभिन्न तरीकों से परिचित कराया गया।
कम लागत वाले मॉडलों से आसान होगा विज्ञान का शिक्षण
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विज्ञान विषय को सरल, रोचक और प्रभावी बनाना रहा। इसके तहत शिक्षकों को ऐसे नवाचारी शिक्षण तरीकों की जानकारी दी गई, जिनकी मदद से विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर प्रयोगों के माध्यम से वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझ सकें।
प्रशिक्षण के दौरान दाब (प्रेशर) और विद्युत (इलेक्ट्रिसिटी) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित विभिन्न गतिविधियां कराई गईं। शिक्षकों ने ब्रेन कैप, बैलेंसिंग बर्ड, चंद्रयान, एंटी-ग्रैविटी मॉडल और जड़त्व से संबंधित मॉडल तैयार किए। इन गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप में समझने का अवसर मिला।
प्रयोगों से समझेंगे विज्ञान के जटिल सिद्धांत
प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि कम लागत वाली सामग्री और सरल प्रयोगों के जरिए विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को भी विद्यार्थियों के लिए आसान बनाया जा सकता है। इस पद्धति से बच्चों में सवाल पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और स्वयं निष्कर्ष निकालने की प्रवृत्ति विकसित करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षक प्रिंस पाल वर्मा ने बताईं शिक्षण की नई तकनीकें
कार्यक्रम में प्रशिक्षक प्रिंस पाल वर्मा ने विभिन्न गतिविधियों और मॉडलों के माध्यम से विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के तरीके बताए। इस दौरान अभिषेक कुमार और छोटे लाल भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रशिक्षण के सफल संचालन में सहयोग किया।
‘आह, आहा और हा-हा’ शिक्षण पद्धति से कराया परिचित
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को अगस्त्या इंटरनेशनल फाउंडेशन के उद्देश्यों और उसकी शिक्षण दर्शनशैली ‘आह, आहा और हा-हा’ से भी परिचित कराया गया। इस पद्धति में बच्चों के भीतर पहले जिज्ञासा पैदा करने, फिर उन्हें स्वयं प्रयोग करके सीखने के लिए प्रेरित करने और अंत में सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाने पर जोर दिया जाता है।
विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
दो दिवसीय प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। इससे उन्हें कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के व्यावहारिक तरीके सीखने का अवसर मिला।
यह पहल विद्यालयों में नवाचार, अनुभव आधारित शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया कि वे विद्यार्थियों के भीतर ज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाकर उनकी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space







